Friday, 22 September 2017

राजिया रा सोरठा

जिण रौ अन्न जळ खाय खळ तिण सूं खोटी करै।
जड़यां मूळ सूं जाय, राम न राखै राजिया।।

जिण रौ अन्न जळ खावै उणी सागै गददारी करण वाळा रौ बंस समूत समूळ ही खतम हुय जावै इयांनका करतघन री तो भगवान ही रछा नीं करै।



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