Monday, 18 September 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिन्दी

काच़,कटोरो,नेणजळ,मोती दूध अर मन।
इतणां फाटया ना मिलै लाखां करौ जतन्न।।

कांच का कटोरा, आंखों का पानी अर्थात शरम-हया, मोती, दूध और मन एक बार फटने के बाद लाख प्रयत्न करने के बाद भी नहीं मिलते हैं।‍

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