Saturday, 30 September 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिंदी


कुण सुणे किणने कहूं, ऐसी आन पड़ी।
किण किण ने समझाइये, कुवे भांग पड़ी।।
राजस्थानी का दोहा आज भी प्रासंगिक है जब कुएं में ही भांग पड़ गई हो और उसे पीकर सारे गांव के लोग ही बावळे हो रहे हो तो कवि कहता है कि आप ऐसी हालत में किस किस को समझा सकेंगे।

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