Friday, 8 September 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिंदी

इक पोथी इक पदमणी ,नह दीजै पर हत्थ ।
वा बिगङै पंडित बिना,वा बिगङै पर सत्थ ।।
कवि कहते हैं कि पुस्तक और वनिता अर्थात स्त्रियां पराए हाथों में नहीं सौंपे। विद्वान के बिना पुस्तक का और सत्य पथ पर नहीं चलने वाला हो तो दोनों का विनाश निश्चित है।
सवाई सिंह महिया जाटावास

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