Monday, 25 September 2017

राजिया रा सोरठा

खळ गुळ अण सूंतायए एक भाव कर आदरै।
ते नगरी हूंताय रोही आछी राजिया।।
जका नगर में खळ अर गुड़ एक ही भाव तुलै। कवि राजिया कहवै है क नगरी हुंता भी उण सूं तो रहवण वास्तै रोही ही भली हुवै।

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