Thursday, 24 August 2017

उत्थलो राजस्थानी सूं हिन्दी..

   कहो लुवां कित जावसौ ,पावस धर पङियांह।
                  हिये नवोढा नार रै ,बालम बीछङियांह।
मारवाड़ में गर्मी के दिनों में तपती लू से कवि पूछता है कि हे लू इस धरती पर बरसात होने पर तुम कहां जाओगी, तेरा ठिकाना कहां होगा। लू का जवाब होता है कि प्रियतम से बिछुड़ी हुई नवयौवना के ह्रदय में बस जाऊंगी।
संकलन--सवाईसिंह महिया

No comments:

Post a comment