Thursday, 17 August 2017

बडेरां री बातां

केई दिनां सूं मारवाड़ में मेह री उडीक है। करसा गिगनार कांनी देखता रहवै कदास इन्दर भगवान री मेहर हुवेला।आजकाल तो बरखा,मेह- पाणी वास्ते मौसम विभाग रा अफसरां रो मूंडो जोवां बडेरां तो जीवण रौ आधार बातां में ही सार रूप में कहगा।
              कंचन जेड़ी उजळी, उत्तर बीज सुहाय।
              अग्गम देवै सूचना, बेगी बिरखा आय।।
कवि अरथावे है क  सुवर्ण आभा जेड़ी बिजळी उत्तर दिस में चमके तो बडेरां री सीख है क मेह बेगो ही आवेला.

2 comments:

  1. बडेरां री बातां साव साची पण कळजुग है आज काल तो पाणी आख्‍यां में ई कोनी पछैस तो कैबा आ ई है क हरी करै सो खरी

    ReplyDelete
  2. बांता तो घणी साँची है पर अबकी बार ओ मेह तो भरोसे ही राखतो लाग रियो है

    ReplyDelete